अपने बच्चे को बिना चोट पहुँचाए अनुशासित करने के आठ तरीके।

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जिस तरह एक घर के लिए अच्छी नींव की आवश्यकता होती है।उसी तरह अच्छे चरित्र के लिए अनुशासन और नैतिक मूल्यों की आवश्यकता होती है।इन मूल्यों का किसी भी समाज की उन्नति तथा पतन में एक महत्तवपूर्ण स्थान होता है।
बिना अनुशासन के जीवन व्यर्थ है इसके बिना कोई भी अच्छा काम पूरा नहीं किया जा सकता है।इसलिए बचपन से ही बच्चों को अनुशासित रखा जाए तभी वो अपने जीवन में उन्नति पा सकते हैं और हर कठिन काम को करने की हिम्मत जुटा सकते हैं।अनुशासन की आवश्यकता जीवन के प्रत्येक श्रेत्र में होती है।यदि व्यक्ति अनुशासन के नियमों का उल्लंघन करना शुरु कर देता है तो समाज उसे स्वीकार नहीं करता।
झब बच्चे बड़े हो रहे होते हैं तो उनके व्यवहार पर नज़र रखना अभिभावक की ज़िम्मेदारी होती है वरना वे हाथ से निकल सकते हैं।इसलिए थोड़ा अनुशासन जरुरी है।बच्चों को इस प्रकार अनुशासित रखें जिससे वे सकारात्मक रुप से देख सकें।कुछ ऐसे तरीके अपनाने चाहिए जिनके इस्तेमाल से शारीरिक या शाब्दिक चोट के बिना बच्चे सही व्यवहार करना सीखें।
जैसे–


1 छोटे बच्चों को अनुशासन का पालन करने के लिए आप उन्हें पुरस्कार भी दे सकते हैं।
2 उन्हें अनुशासित करने के लिए उन्हें शांत तरीके से समझाने की कोशिश करें।साथ ही उनकी बातों को आराम से सुनें और उसे समझते हुए उन्हें समझाएं।
3 साथ ही उन्हें इस बात के बारे में भी जागरुक करें कि उन्हें ऐसी चीज़ों की ज़िद नहीं करनी चाहिए।जो उनके लिए ठीक नहीं है।
4 बच्चों को सिखाने वाले नियमों को सरल और स्पष्ट रखें ध्यान रहे कि कठिन नियमों को बच्चों पर थोपें नहीं।
5 बच्चों को उनके द्वारा किए गए अच्छे और बुरे बरताव और काम के परिणाम के बारे में बताकर उन्हें सही राह पर चलना सिखा सकते हैं।
6 बच्चों को पढ़ाई करवाने के साथ ही किसी भी नियम का पालन करने के लिए उन्हें विकल्प भी प्रदान करें।यदि आप बच्चों को बिना किसी विकल्प के नियम का पालन करने के लिए कहते है तो वह जिद्दी और लक्ष्यहीन बन जाते हैं।
7 बच्चों के साथ खुद भी अनुशासन का पालन करें।अगर आप अपने बच्चे को अनुशासित बनाना चाहते हैं तो जरुरी है कि पहले आप खुद भी अनुशासित रहें।अगर आप खुद अनुशासनहीनता करेंगे तो बच्चे भी वही करेंगे।
8 जब बच्चा आपकी बात नहीं सुनना चाहता है तो उसके लिए कुछ मनेरंजक दृश्य पैदा करें ताकि वह आपको सुने और आपके अनुसार काम करे।


जिम्मेदार अभिभावक बनें और अपने बच्चे की जरुरतों का ध्यान रखें।
बच्चों के नजदीक रहने और उनके मन की बात को जानने का सबसे सरल तरीका है।उनसे बातचीत करना।आप बच्चों से बात करके उनका विश्वास जीत सकते हैं।बातचीत के ज़रिए है आप बच्चे से सबकुछ सांझा कर सकते हैं।इस तरह वे अपने मन की बात आपसे कहने से नहीं डरेंगे।वे अपनी हर बात आपसे सांझा करेंगे।बच्चों पर जरुरत से ज्यादा नियंत्रण भी न रखें।उन्हें भी थोड़ी जगह दे और उन्हें कभी–कभी अपने मन की करने दें।
बच्चों को और अपने आप को धैर्यवान रखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।यह अनुशासन को दर्शाता है।
इसलिए जीवन में अनुशासन का होना बहुत ही जरुरी है।अनुशासन के बिना कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में सफल नहीं हो सकता।
धन्यवाद।

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